Sunday, August 12, 2007

कृषक की कशमकश और फ़ाक़ाकशी


कर्षण और कशिश एक दूसरे के पर्यायवाची शब्द हैं। संस्कृत और फारसी के इन अलग-अलग शब्दों का अर्थ है खिंचाव, रूझान या किसी ओर झुकाव। प्रचलित अर्थ में अक्सर इन शब्दों का ज्यादातर प्रयोग प्रेम-मुहब्बत या किसी से लगाव के अर्थ में किया जाता है और इस तरह से किसान शब्द से इनका कोई रिश्ता नजर नहीं आता। मगर इनमें रिश्ता है और काफी गहरा है। दरअसल संस्कृत का मूल शब्द है कृष् जिसका अर्थ है खींचना, धकेलना, उखाड़ना और हल चलाना। ध्यान दीजिए कि हल चलाने में ये सभी क्रियाएं पूरी हो रही हैं और हल चलाने का काम कौन करता है? हल खींचे बिना खेती मुमकिन नहीं सो कृष् से बना कृषि शब्द जो संस्कृत-हिन्दी में समान रूप से है। इसी तरह कृषिक: , कृषाण: और कृष्टि: जैसे शब्द भी बने जिनसे हिन्दी में कृषक ,किसान और खींचना जैसे शब्दों का निर्माण हुआ। कृष् से ही संस्कृत का एक अन्य शब्द जन्मा कर्ष: जिसका अर्थ भी खींचना, घसीटना, हल चलाना ही है। इसमें आ उपसर्ग लगने से बना आकर्षण जिसका मतलब है खिंचाव,रूझान या लगाव। कर्ष से ही बने हिन्दी के कसना, कसाव या कसावट जैसे शब्द जिनमें भी खिंचाव का अर्थ निहित है।
प्राचीन फारसी यानी अवेस्ता में भी कृष् शब्द इसी अर्थ में प्रचलित था। आज की फारसी में इसका रूप कश के रूप में मिलता है। कश यानी खींचना। गौर करें कि धूम्रपान में धुएं को खींचा जाता है इसलिए इस क्रिया को कश कहा जाता है। इसी कश से बना कशिश जिसका मतलब भी आकर्षण ही है। कशमकश, रस्साकशी, मेहनतकश, नीमकश फाकाकशी जैसे शब्दों में भी यह मौजूद है। यही नहीं कपड़ों पर बेलबूटे बनाने की प्रसिद्ध कला के लिए कशीदाकारी शब्द के मूल में भी कृष् से बना यही कश मौजूद है। बेलबूटे बनानेवाले कारीगर बड़ी नफासत से कपड़े में सुई धागे को डालते हैं और उसे खींचते हैं। यही है कशीदाकारी। फारसी में कशीद: का अर्थ है बेलबूटे बनाना। नाराजगी या गुस्से में भी व्यक्ति का चेहरा तन जाता है। यह तनना भी एक किस्म का खिंचाव ही है इसलिए कशीदः का एक अन्य अर्थ खिंचा हुआ, नाराज या गुस्से में रहने वाला भी हुआ।
अगली कड़ी में- कृष्ण की गली में

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6 कमेंट्स:

Gyandutt Pandey said...

आपकी पोस्ट पढ़ने में थोड़ा धैर्य दिखाना पड़ता है. पर पढ़ने पर जो ज्ञानवर्धन होता है, वह बहुत आनन्ददायक होता है!

अनिल रघुराज said...

आपने राह दिखाई तो हम भी यहां पहली बार आ धमके। शब्दों का अच्छा कर्षण कर रहे हैं। लेकिन जो भाव कशिश में महसूस होता है, वह आकर्षण में नहीं।

अभय तिवारी said...

रुसी कुसाक को भी इसी सूची में जोड़ दीजिये..

आप को लगातार पढ़ रहा हूँ.. पर प्रतिक्रिया नहीं कर सका.. आप बढ़िया काम कर रहे हैं.. प्रतिक्रिया की चिंता मत करें.. आप कालजयी काम कर रहे हैं.. आप की जैसी स्थिरता मेरे पास होती तो मैं भी आप के पीछे पीछे चलता..

अजित वडनेरकर said...

ज्ञानजी, अनिलजी, अभयजी
आपने जो उत्साहवर्धन किया है उसके लिए आभारी हूं। सफर तो यकीनन चलता रहेगा। ज्ञानजी , मेरी बेचारी पोस्ट को सचमुच आपके धीरज की ज़रूरत है। कृपया इसे बनाए रखिये। आनंदम्-मंगलम्

Shastri JC Philip said...

आप इस तरह से जो ज्ञान संपदा एकत्रित कर रहे हैं इसका दूरगामी परिणाम होगा. लिखते रहें !!

Anonymous said...

Ajit ji, aapke lekh niyamit padhta hoon. Aap majedaar aur kinhi arthon mein bahut zaroori kaam kar rahe hain. Iske liye taarif bhi kam hogi. Ek choti si viniti hai. Font evam point size par thoda dhyan den. Shukriya Saurabh Budhkar

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