Saturday, October 6, 2007

सिर्फ नाटक में नहीं सूत्रधार !

सूत यानी रूई से बुना हुआ धागा। इस धागे से बुने हुए कपड़े को सूती कपड़ा कहा जाता है। सूत शब्द बना है संस्कृत के सूत्र से जिसका मतलब होता है बांधना , कसना, लपेटना वगैरह। जाहिर है रूई अथवा रेशम को बटने की क्रिया में ये शामिल हैं। इससे बने सूत्रम् शब्द का अर्थ हुआ धागा, डोरा, रेशा, तंतु, यज्ञोपवीत अथवा जनेऊ आदि। जनेऊ को ब्रह्मसूत्र भी कहते हैं। गौरतलब है कि संस्कृत के सूत्रम का अर्थ केवल कपास से बना रेसा नहीं है बल्कि रेशमी धागे को भी सूत् ही कहा जाता है। हालांकि संस्कृत में कपास के लिए सूत्रपुष्पः शब्द भी है। सूत्र का एक अर्थ गुर, संक्षिप्त विधि अथवा तरीका भी है।
सूत्र से ही बना है सूत्रधार। सामान्य तौर पर किसी घटना या कार्य का श्रीगणेश करने वाले को सूत्रधार कहते हैं। यूं सूत्रधार रंगमंच का वह प्रमुख व्यक्ति होता है जिसके हाथ में पर्दे की डोरी यानी सूत्र होता है और जब वह डोरी खींचता है तभी नाटक का श्रीगणेश होता है। यह सूत्रधार नाटक की प्रस्तावना में भी प्रमुख भूमिका अदा करता है। पुराणों में रंगमंच प्रबंधक के लिए भी इस शब्द का प्रयोग किया गया है। इसके अलावा बढ़ई व दस्तकार को भी सूत्रधार कहते है। आज अपराध, राजनीति, कला या अन्य किसी भी क्षेत्र में शुरूआत करने वाले या अगुआ रहने वाले के लिए इस शब्द का प्रयोग हो जाता है। सूत्रधार यानी गुरुघंटाल ।
इसी तरह किसी कार्य के आरम्भ के लिए सूत्रपात शब्द भी है। सूत्र यानी डोरा और पात् यानी गिरना या गिराना। यानी डोरी गिराना। वैसे यह कर्म संस्कृति से जुड़ा शब्द है और निर्माण यानी भवन निर्माणकार्य में प्रयुक्त होता है। गौरतलब है कि पुराने ज़माने से आज तक भवन निर्माण अथवा भूमि की नाप-जोख के लिए एक किस्म के धागे या डोरी का प्रयोग ही होता रहा है। प्राचीनकाल में एक डोरी या धागा जिसके सिरे पर लकड़ी का गुटका बंधा होता था, ज़मीन की पैमाइश के काम आता था। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले की नापजोख के लिए इस गुटके को हाथ से नीचे गिराया जाता था जिसके साथ डोरी भी ज़मीन पर गिरती थी , इस पैमाइश की इस क्रिया को ही सूत्रपात कहते थे । बाद में किसी भी बड़े काम की शुरूआत के लिए सूत्रपात शब्द चल पड़ा।

4 कमेंट्स:

अनामदास said...

अजित भाई
मज़ेदार है. शायद सुताई और सूतना जैसे स्लैंग के सूत्र भी इसी से जुड़े हैं जिनका तात्पर्य खींचने और ठोंकने से है. बिहार और झारखंड में पतली रस्सी को सुतली कहते है. इंदिरा गांधी के बीस सूत्री कार्यक्रम के सारे धागे कितने उलझ गए थे आपको याद होगा. सूत से याद आया कि एक बहुत घटिया सूती कपड़ा भारत में मिलता था एक ज़माने में राशन के तहत, सत्तर के दशक तक, नाम था मारकीन. उसकी कहानी ये है कि बांग्ला में अमेरिकन को मारकीन ही कहते हैं और ये कपड़ा ग़रीब लोगों के लिए बहुत सस्ते में या शायद अनुदान के रूप में अमरीका से आता था, कफन से लेकर रज़ाई के खोल बनाने तक इसका इस्तेमाल बहुत होता था, शायद अब भी होता हो.

Sanjeet Tripathi said...

बहुत बढ़िया!! शुक्रिया!!

Raj Yadav said...

बहुत सही लिखा है आपने ..एकदम लीक से हटकर ..सूत को बिल्कुल सुलझा दिया ...
बहुत ही अच्छा लिखा है आपने .......साधुवाद ....कभी हमारे ब्लोग पर भी आईये
विचारों कि जमीन

vimal verma said...

वाह क्या सूत से सूत्रधार को मिलाया है, अच्छा है अजित भाई आप रोज़ कुछ ना कुछ नया लेकर आते है जो हमेशा की तरह रोचक जानकारी से लबालब रहता है च्छा लगता हैआपके यहां आना सुखद है.

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