Thursday, June 4, 2009

कहिए, क्या खबर है?

अगर किसी बात में सूचना बनने लायक तत्व नहीं है तो उसका भी कोई महत्व नहीं है।mainpicture
ज का युग सूचनाओं का है जिनके बीच हम जीते हैं। सूचनाओं की भीड़ में सूचना बनने का दबाव इतना अधिक है कि हमारे इर्द-गिर्द जो कुछ होना चाहिए, उसे इस अंदाज में किया जाता है कि वह सूचना में तब्दील हो जाता है।  हिन्दी में सूचना से जुड़े कई शब्द प्रचलित हैं जैसे संवाद, समाचार, खबर वार्ता आदि।
सूचना-संसार में सूचना देने वाले को संवाददाता कहा जाता है जिसका अर्थ हुआ संवाद देना। संवाद अर्थात सूचना। संवाद बना है सम+वद् से। सम् यानी समान रूप से और वद् यानी कहना। अर्थ हुआ बोलना, बतियाना, कहना-सुनना। संस्कृत धातु वद् के व्यापक अर्थ हैं। संवाद में निहित अर्थों में कहना, बोलना के साथ सम्प्रेषित करना और अभिव्यक्त करना जैसी बातें शामिल हैं। इस तरह संवाददाता का अर्थ हुआ समाचार देने वाला। खबरनवीस, न्यूज़मैन। मराठी में संवाददाता को वार्ताहर कहते हैं। वार्ता यानी समाचार और हरः यानी दूत यानी देने वाला। मतलब हुआ संवाददाता। वार्ता का अर्थ भी खबर या समाचार होता है। यह बना है वृत्त से जिसमें गोल, घेरा जैसे भाव तो हैं ही साथ ही घटना, बीता हुआ, खबर,समाचार, नियम आदि भाव भी हैं। इतिवृत्त का अर्थ होता है सम्पूर्ण घटनाक्रम। वृत्ति भी इससे ही बना है जिसमें अवस्था, शैली, कार्य जैसे भावों के साथ शब्द की शक्ति का भाव भी शामिल है। भाषिक-रचना की शैली भी वृत्ति कहलाती है। इससे बने वार्त्ता का मतलब होता है समाचार, गुप्त बात आदि। बातचीत के अर्थ में जो बात शब्द हम आए दिन इस्तेमाल करते हैं वह इसी वार्त्ता का ही परिवर्तित रूप है। हिन्दी की विभिन्न बोलियों में बातां, बतियां जैसे शब्द-प्रयोग भी प्रचलित हैं।
सूचना के लिए सबसे लोकप्रिय शब्द है ख़बर। दिन में कई बार इसका प्रयोग होता है। किसी से भी मिलने पर एक सामान्य सा संवाद तय है-क्या खबर? खबर सेमेटिक भाषा परिवार का शब्द है और अरबी से फारसी उर्दू होते हुए हिन्दी में दाखिल हुआ। यह बना है खब्बार से। इसकी मूल धातु है ख-ब-र जिसमें सूचना देना, ज्ञान देना, सलाह देना जैसी बातें शामिल हैं। ख़बर का मतलब हुआ सूचना, संवाद, समाचार, संदेश, पैग़ाम आदि। अरबी में पैगम्बपर मुहम्मद साहब के प्रवचन को भी ख़बर कहा गया है। इसका बहुवचन होता है अख़बार अर्थात समाचार पत्र। जाहिर है अखबार में बहुत सी खबरें होती हैं इसलिए उसे अख़बार यानी ‘खबरों का समूह’ कहा जाता है। यूं तो सूचना देने वाले को ख़बरनवीस कहा जाता है पर इसका सही अर्थ हुआ खबरलिखने वाला। यहां पत्रकार वाला भाव कम उभरता है। वैसे ख़बररसां और खबरगीर जैसे शब्द भी अरबी-फारसी में हैं जिनका मतलब होता है खबर पहुंचानेवाला और खबर लेने वाला। ख़बरदार शब्द भी इससे ही बना है

…खबरनवीस और मुख़बिर का अर्थ लगभग एक जैसा ही है और काम भी…. newspapersNewspapers2 

जिसमें सचेत, होशियार या सावधान रहने का भाव है। विशेष समाचार पहुंचाने वाले के लिए मुख़बिर शब्द है। इसमें गुप्तचर या जासूस का भाव निहित है। जिस तरह अख़बारों यानी समाचार पत्रों में तनख्वाह पाने वाले ख़बरनवीस होते हैं वैसे ही कुछ सरकारी महकमों में तनख्वाह पाने वाले मुखबिर भी होते हैं। दोनों का ही काम ख़बरें लाना होता है। जहा पत्रकार की ख़बरें तत्काल जनता तक पहुंचती हैं वहीं मुख़बिर की ख़बरें जनता तक कभी नहीं पहुंचती।
बर के साथ ही समाचार शब्द भी इन्ही अर्थो में खूब चलन में है। समाचार बना है सम+आचार से। सम यानी समान रूप से। आचार का अर्थ होता है समाज में व्याप्त व्यवहार, रीति, काम करने का ढंग, चालचलन, प्रथा आदि। इस तरह खबर के अर्थ में समाचार शब्द सम्पूर्णता लिए हुए है। समाचार का अर्थ हुआ समाज के लोकाचारों अर्थात जो कुछ भी समाज में घट रहा है उसके बारे में समरूप यानी जस का तस बताना। एक सूचना सही अर्थों में तभी समाचार कहलाती है जब उसमें सभी तरह की जिज्ञासाओं के उत्तर हों।
अंग्रेजी का न्यूज़ news शब्द अब हिन्दी में भी खूब इस्तेमाल होता है जिसका मतलब भी ख़बर या समाचार ही होता है। आमतौर पर लम्बे समय बाद एक दूसरे से मिलने पर हम लोगों का हाल जानते हैं जिसे इतिवृत्त कह सकते हैं। मगर जिनसे हम रोज़ ही मिलते हैं उनसे भी शिष्टाचारवश हाल-चाल पूछा जाता है जिसमें ‘क्या हाल है’ जैसे वाक्य होते हैं। इन वाक्यों में कही न कहीं यह छुपा होता है कि ‘नया क्या है’, बस, अंग्रेजी के न्यूज़ शब्द का यही अर्थ है। यह बना है new से जिसका मतलब होता है नवीन, नूतन या नया। मध्यकालीन अंग्रेजी ने लोकव्यवहार में आए भाषायी बदलाव से एक नया शब्द ग्रहण किया जो न्यू के बहुवचन के तौर पर इस्तेमाल होने लगा था। इसे न्यूज़ की तरह उच्चारा जाता था जिसमें नया क्या? वाला भाव ही था। एक अन्य मान्यता के अनुसार news शब्द north, east, west, south का संक्षेपीकरण है। यह दिलचस्प है मगर इससे समाचार वाले भाव की पुष्टि नहीं होती।
संस्कृत की धातु है सूच् जिसमें चुभोना, बींधना जैसे भाव तो हैं ही साथ ही निर्देशित करना, बतलाना, प्रकट करना जैसे अर्थ भी इसमें निहित हैं। दरअसल इसमें सम्प्रेषण का तत्व प्रमुख है। इन तमाम भावों का विस्तार है पता लगाना, भेद खोलना और भांडाफोड़ करना आदि। पत्रकारिता विभिन्न सूचनाओं के जरिये यह काम बखूबी कर रही है। सूचना शब्द आता है सूचः से बने सूचनम् शब्द से जिसमें संकेत करना, जतलाना, बतलाना, इशारा करना, समाचार देना आदि निहित है। इसमें पढ़ाना और अवगत कराना भी शामिल है। जिसे हम ज्ञान कहते हैं दरअसल वे सूचनाएं ही तो हैं जो पढ़ने-पढ़ाने की क्रिया से हमें मिलती हैं। सूचना के दायरे में अब सिर्फ खबर, रिपोर्ट, समाचार, न्यूज़ आदि बातें शामिल हो गईं हैं। सूचना देने की क्रिया सूचित करना कहलाती है।

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15 कमेंट्स:

हिमांशु । Himanshu said...

निश्चय ही समाचार शब्द सम्पूर्णता का बोध कराता है । खबर की व्युत्पत्ति जानना रोचक रहा । आभार ।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

मैं ने इसी लिए ब्लागीर, ब्लागिरी जैसे शब्दों का प्रयोग करता रहा पर शायद लोगों को ब्लागर या ब्लागिंग अभिजात्य प्रतीत होता है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सूचना, समाचार और न्यूज सबकी तह में जाकर अच्छी जानकारी उपलब्ध कराई।
धन्यवाद।

ताऊ रामपुरिया said...

एक और शानदार जानकारी का इजाफ़ा हुआ. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

बहुत बढ़िया वार्ता रही। हम ख़बरों की उत्पत्ति से सूचित हुए। मु्ख़बीर का सम्बन्ध मुख से नहीं ख़बर से है यह आज ही ध्यान आया। संवाद का शुक्रिया।

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

खबर की खबर खबरनवीस ही दे सकता है . खबर के हर पहलू की सूचना मिली . धन्यबाद बहुत छोटा शब्द लगता है आपके अनुसन्धान की प्रशंसा करने के लिए

डॉ. मनोज मिश्र said...

सही है सूचना.

Anil Pusadkar said...

इति वार्तानाम।वार्ताहार शब्द तो बचपन से सुन रहा हूं पर इस्के बारे जान आज रहा हूं।

अनिल कान्त : said...

आज का लेख पढ़कर बहुत अच्छा लगा ...काफी ज्ञानवर्धक है

रंजना said...

आभार इस ज्ञानवर्धक शब्द यात्रा के लिए....

किसी समय समाचार का तात्पर्य होता था जो घटित हुआ ,उसका उसी रूप में उल्लेख...पत्रकार का अपना उसमे स्वर के सिवा कुछ भी समाहित नहीं होता था...परन्तु आज की पत्रकारिता,विशेषकर टी वी चैनलों में देखकर लगता है यह प्रतिदिन कितनी निम्स्तरीय होती जा रही है....आज खबर वह खबर नहीं रह जाती जो वह वास्तविक रूप में होती है,बल्कि वह हो जाती है,जैसा उसे पत्रकार परोसते हैं.....

Dr. Chandra Kumar Jain said...

अख़बार...ख़बर...सूचना
संवाद....वार्ताहर....मुख़बिर...ख़बरनवीस !
===============================
कितना कुछ बता दिया आपने.
आभार
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

" किसी ने मनमोहन सिँह से कहा कि,
" ये गुजराती बडे चँट होते हैँ !
" क्या खबर ? "
पूछ पूछ कर,
नये से नयी बात जान लेते हैँ -
तो उन्होँने इस बात की परीक्षा करने की ठानी और भेस बदल कर, गुजरात पहुँचे
पहले मिला उसी से पूछ लिया,
" क्या खबर ? "
उसने धीमी आवाज़ मेँ उत्तर दिया,
" सुना है वो मनमोहनीया गुजरात आ रहा है ! "
:-)
- लावण्या

अभिषेक ओझा said...

मुझे तो ये याद आया: इयं आकाशवाणी संप्रतिवार्ताः...

Mansoor Ali said...

aapke lekh gyan vradhhak to hote hi hai, prernadayak bhi hote hai, dekhiye, lavanyaji se kya achchhi baat kehalvadi aapne.
m.h.

note:-Hindi baksa bhi ab roman ban gaya hai, kahi pura angrez na ban jaye, nahi to aapko English mein "Travel" karna padega.

Govind Kumar said...

इतनी शिद्दत से किया गया एक अथक और एक सफल प्रयास ..............सच में आप के इस लेख ने मुझे प्रभावित और ज्ञानमय किया

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