Monday, January 17, 2011

टैक्सी की तकनीक, टैक्स की दक्षता

पिछली कड़ियाँ--1.हाथों की कुशलता यानी दक्षता 2.दक्षिणापथ की प्रदक्षिणा

ज का दौर तकनीक का है और कामयाबी के लिए मनुष्य को तकनीकी रूप से दक्ष होना बेहद ज़रूरी है। इस वाक्य में आए तकनीक और दक्ष शब्दों का न सिर्फ जन्म एक ही मूल से हुआ है बल्कि अर्थ में भी काफी समानता है। सबसे पहले बात तकनीक की। दरअसल यह शब्द अंग्रेजी के टेक्नीक से लिया गया है और tax-dayपिछले पाँच छह दशकों से हिन्दी में खूब प्रयोग किया जा रहा है। इसका अर्थ है सूझ बूझ, चातुर्य, शिल्प, कौशल, यांत्रिक हुनर अथवा कारीगरी।  तकनीक शब्द का मुख्य आधार यह अंग्रेजी शब्द ग्रीक मूल का है और तेख्ने से बना है। टेक्निकल, टेक्नो, टैक्नोक्रेट, टेक्नोलाजी जैसे कई शब्द भी इसी मूल आधार से जन्मे हैं। दरअसल संस्कृत की धातु दक्ष से ही ग्रीक तेख्ने, संस्कृत हिन्दी के ही दक्ष और तक्ष जैसे शब्द बने। संस्कत हिन्दी में जहाँ दक्ष का अर्थ किसी काम में निपुण. योग्य, चतुर और कुशल होता है, वहीं तक्ष का अर्थ किसी चीज़ को बनाना, निर्माण करना और रचना है। इसके अलावा छीलना, काटना, तोड़ना व तराशना जैसे अर्थ भी इसमें समाहित हैं। डॉ रामविलास शर्मा के मुताबिक बढ़ई का काम कुछ गणसमाजों में बहुत महत्वपूर्ण रहा होगा, इसलिए इस शब्द का प्रयोग कारीगर विशेष के लिए होने लगा। ग्रीक भाषा में उसका सम्बन्ध सामान्य कौशल से है। तैख़्ने अर्थात कौसल और तैख़्नितेस यानी कलाकार, कारीगर। यह शब्द फ्रैंच से होता हुआ अंग्रेजी में टेक्नीक बना। हिन्दी में इसने तकनीक, तकनीकी जैसे रूप ग्रहण किए। टैक्नीशियन यानी दस्तकार, शिल्पी। अब इस शब्द का प्रयोग इंजीनियर या मशीनी काम जाननेवाले के संदर्भ में होता है।
गौरतलब है कि तक्ष के छीलना, चीरना, काटना, छेनी से तराशना, गढ़ना, बनाना जैसे अर्थ काष्ठकला के संदर्भ में हैं इसीलिए संस्कृत में बढ़ई को तक्षन् या तक्षक भी कहा जाता है। तक्षक यानी किसी भी कार्य का सूत्रधार, देवताओं का वास्तुकार। इसीलिए देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा का नाम तक्षक भी है। तक्षक एक प्रतिष्ठित नाग का नाम भी है जो नागलोक अर्थात पाताल में रहता है। वृहत्तर भारत के पश्चिमोत्तर स्थित प्रसिद्ध शिक्षाकेंद्र तक्षशिला को याद करें। इसका इतिहास पुराणों तक जाता है। कहते हैं कि भरत, जिनके नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा, अपने पुत्र तक्ष के लिए यह नगर बसाया था। तक्षशिला गांधार देश की राजधानी थी और करीब डेढ़ हजार वर्ष पहले तक वहाँ आबादी थी। तक्षशिला के अवशेष आज के रावलपिण्डी के इर्दगिर्द बिखरे हुए हैं। चाणक्य यहीं पढ़ाते थे और चंद्रगुप्त यहीं पढ़े थे।
खास बात यह कि लकड़ी के काटे और तराशे जा चुके सुडौल टुकड़े के लिए फ़ारसी में तख़्तः शब्द बना है जिसे हिन्दी में तखता या तखती कहते हैं। मद्दाह साहब के उर्दू हिन्दी कोश के अनुसार इसका अर्थ है लकड़ी का लम्बा,चौड़ा और थोड़ा मोटा टुकड़ा, जहाज़ के फ़र्श का हर टुकड़ा जो लकड़ी का हो, काग़ज़ की शीट, लकड़ी का वह पटरा जिस पर मुरदा नहलाया जाता है। यह मूल रूप से तक्ष ही है। बाद में लकड़ी से बनी चौकी, पलंग और बादशाह के आसन के अर्थ में फारसी उर्दू में तख़्त शब्द चल पड़ा। बड़ा, ज्येष्ठ के अर्थ में भी तख्त का प्रयोग होता है। अब तो तख़्त का अर्थ ही हुकुमत हो गया है। तख्त से जुड़े कई पद हिन्दी में प्रचलित हैं जैसे तख़्तनशीं या तख़्तेशाही यानी बादशाह के बैठने का राजसिंहासन। यही भाव तख्ते-ताऊस में साफ़ नुमांया हो रहा है जिसे शाहजहाँ ने बनवाया था। इसी कड़ी में आता हैं तख़्तोताज जिसका अर्थ है शासनसूत्र, राज्यभार, हुकुमत का इंतजाम या तख़्तेसुलेमानी जैसे शब्द। जाहिर है दक्ष-तक्ष से तख़्त तक इस शब्द के रूप बदले मगर अर्थ में ज्यादा बदलाव नहीं आया।

car_clipart_taxi... टैक्सी taxi किसी ज़माने में टैक्सीमीटर कार हुआ करती थी अर्थात ऐसी सवारी गाड़ी जिसमें बैठने के बाद मनचाहे गंतव्य का भाड़ा अपने आप मीटर के ज़रिये पता चल जाए। इसकी शुरुआत जर्मनी में 1890 के आसपास मानी जाती है।...

गौरतलब है कि तक्ष, दक्ष से जुड़े सभी शब्दों में काम करना प्रमुख है। दूसरी महत्वपूर्ण बात है हाथों का प्रयोग। दक्ष में दाहिने हाथ का भाव निहित है। ज़ाहिर है बाँए की तुलना में दायाँ अधिक कुशल होता है सो कुशल के अर्थ में दक्ष शब्द रूढ़ हो गया। दक्ष का अगला रूप तक्ष हुआ जिसमें कुशल कारीगर, कलाकार की अर्थवत्ता निहित है। यह परिवर्तन भारोपीय भाषा परिवार के नक्शे पर पूर्व से पश्चिम तक सभी भाषाओं में हुआ। संस्कृत में हाथ के लिए हस्त शब्द है। बरास्ता अवेस्ता, इसका फ़ारसी रूप होता है दस्त। दस्ताना इसी कड़ी में आता है। डॉ रामविलास शर्मा के अनुसार पूर्ववैदिक किसी मूल मूल भाषा में इन दोनों का रूप था धस्त। अवेस्ता में धस्त से का लोप होकर दस्त शेष रहा और संस्कृत में का लोप होकर हस्तः बचा। इसमें मूल धातु दस् है। इससे ही दक्ष जैसी क्रिया भी जन्मी। उनके अनुसार अंग्रेजी की टेक take क्रिया का रिश्ता भी इससे ही है। टेक take  यानी लेना। लेने का काम हाथों से ही होता है। क्ष से बनी दक्षिणा का एक लक्षण कर का भी है। इसी तरह टेक क्रिया से ही टैक्स tax यानी कर जुड़ा है। जिसे लिया जाए वही है कर। हिन्दी का कर भी इसी लिए टैक्स है क्योंकि इसका जन्म भी संस्कृत धातु कृ से हुआ है जिसमें करने का भाव शामिल है। जाहिर है लेना भी एक क्रिया ही है और देना भी। कर चुकाने के लिए कार्य करना पड़ता है जो हाथों से ही होता है। हाथ के लिए कर शब्द भी इसी मूल से निकला है।
यूँ अंग्रेजी के टैक्स का रिश्ता डगलस हार्पर की एटिमऑनलाईन के अनुसार टैक्स का रिश्ता भारोपीय धातु tag- से है जिसमें छूने या हाथों में थामने, संभालने का अर्थ निहित है। गौर करें यहाँ भी हाथ या करने की क्रिया प्रभावी हो रही है। वैसे यह कोश अंग्रेजी की टेक क्रिया की व्युत्पत्ति को अज्ञात भी बताता है। जो भी हो, डॉ शर्मा इस दिशा में ठोस संकते तो करते ही हैं। दुनियाभर में सवारी गाड़ी के रूप में मशहूर टैक्सी का रिश्ता भी इसी शृंखला से जुड़ा है। टैक्सी taxi किसी ज़माने में टैक्सीमीटर कार हुआ करती थी अर्थात ऐसी सवारी गाड़ी जिसमें बैठने के बाद मनचाहे गंतव्य का भाड़ा अपने आप मीटर के ज़रिये पता चल जाए। इसकी शुरुआत जर्मनी में 1890 के आसपास मानी जाती है। अंग्रेजी का टैक्स बना है लैटिन के टैक्सेयर taxare से जिसमें छूने, पकड़ने, थामने का भाव है। मूल रूप से इसका अर्थ था कर लगाना या कर लेना।  बात चाहे टैक्सी चलाने की हो या टैक्स वसूलने की, हर काम में दक्षता ज़रूरी है। टैक्स वसूलने में जहाँ खासी समझ की ज़रूरत होती है वहीं टैक्स चुकाना भी समझदारी का ही काम है।

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7 कमेंट्स:

Asha said...

अच्छी जानकारी देती रचना |
आशा

Mansoor Ali said...

'शब्द' व्याख्या की आपकी 'तकनीक' लाजवाब है.


कर से कैसे 'कर' बचाए इसमें तो हम 'दक्ष' है,
जो कमाया, ख़ुद ही खाए; ये हमारा लक्ष्य है !

जिसमे हो अपनी 'सुविधा',है नियम अच्छे वही !
है 'मना' गर ब्याज तो फिर कर ये कैसे 'भक्ष्य' है?
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'तख़्त' से 'तख्ते' तलक की दास्ताँ कितनी अजीब,
'तक्ष' का सुन्दर नमूना, मौत का एक 'कक्ष' है.

-Mansoor ali Hashmi
http://aatm-manthan.com

अफ़लातून said...

लोहिया ’टिकस’ शब्द का भी इस्तेमाल टैक्स के लिए करते थे

प्रवीण पाण्डेय said...

टैक्सी सच में बड़ी टैक्सिंग हो गयी है।

अभय तिवारी said...

बहुत बढ़िया

निर्मला कपिला said...

बहुत दिनों बाद आ पाई हूँ। बहुत से शब्द छूट गये हैं। लेकिन आपकी तकनीक शब्दों को विस्तार से समझाने की बहुत अच्छी लगती है। धन्यवाद और शुभकामनायें।

Dr. shyam gupta said...

दक्ष--प्रज़ापति ब्रह्मा के दाहिने अन्गुष्ठ से उत्पन्न हुए, वे सर्वप्रथम प्रज़ापति व सर्वप्रथम मैथुनीय स्वयं-प्रजनन( automatic process for sexual reproduction )में दक्ष हुए जिससे समस्त मानव श्रिष्टि की उत्पत्ति हुई---अतः दक्ष--दक्षता--दक्षिण दिशा..क्योंकि सूर्य की प्राची दिशा उन्मुख होने पर दायीं तरफ़ की दिशा दक्षिण...

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