Tuesday, October 23, 2012

उम्र की इमारत

stoneAgeपिछली कड़ी-‘बुनना’ है जीवन

यु के लिए हिन्दी का सबसे लोकप्रिय शब्द उम्र है । इसके अलावा अंग्रेजी का एज शब्द भी हिन्दी में खूब प्रचलित है । इसके उमर, उमिर, उमरिया जैसे रूप भी हिन्दी की विभिन्न शैलियों में प्रचलित हैं । उम्र मूलतः सेमिटिक परिवार की अरबी भाषा का शब्द है और बरास्ता फ़ारसी इसकी आमद हिन्दी में हुई है । हिन्दी में सर्वाधिक बोले जाने शब्दों में यह भी एक है । गौर करें कि किन किन सन्दर्भों में हम सुबह से शाम तक उम्र / उमर शब्द का प्रयोग करते हैं । अरबी में उम्र का अर्थ जीवन, जीवनकाल है । प्रायः सभी भाषाओं में जीवन, ज़िंदगी के साथ निर्माण या रचना जैसे शब्दों का प्रयोग होता है । “ज़िंदगी बनाना”, “ज़िंदगी बनना”, “जीवन सँवारना”, “जीवननिर्माण” आदि वाक्यों से यह स्पष्ट हो रहा है । वय शब्द में बुनावट वाले भाव का आशय जिस तरह से जीवन को सँवारने से जुड़ रहा है वही बात उम्र की मूल सेमिटिक धातु अम्र में भी है जिसमें निर्माण का भाव प्रमुख है ।
रबी में उम्र का आशय जीवन या जीवनकाल से है । जीवनकाल यानी व्यतीत किया हुआ जीवन । बिताई गई आयु । अन्द्रास रज्की के मुताबिक फ़ारसी में इसका उच्चारण ओम्र की तरह है तो अज़रबैजानी और तुर्की में ऊमूर, हिन्दी यह उमर या उम्र है तो स्वाहिली में उम्री, उज़्बेकी में यह उम्र है और तातारी में गोमेर । अल सईद एम बदावी की अरेबिक इंग्लिश डिक्शनरी ऑफ कुरानिक यूसेज़ के मुताबिक । अम्र से ही अमारा बनता है जिसका अर्थ है बसना, बसाना, सभ्य होना, शिष्ट होना, सुधारना आदि । गौर करें, आदिम युग से ही तमाम मानव समूहों की ये आरम्भिक क्रियाएँ रही हैं । जन्म लेना भर जीवन नहीं है । जन्म लेने के बाद का शारीरिक विकास ही जीवन नहीं है । बीहड़ इलाके को रहने योग्य बनाना, फिर भोजन के लिए बंजर भूमि को खेती योग्य बनाना, फिर समूह में रहते हुए रीति-नीति का विकास जिससे सभ्यता और संस्कृति का निर्माण होता है । यह है अमारा का मूल भाव । सिर्फ़ जी भर लेने से उम्र नहीं गिनी जाती बल्कि युग की तरह जीवन का निर्माण करने में उम्र की सार्थकता है । इसीलिए महान व्यक्तियों के जीवनकाल को युग कहा जाता है क्योंकि वे जीवन जीते नही हैं , बल्कि निर्माण करते हैं । अंग्रेजी के एज  age शब्द में जहाँ उम्र की अर्थवत्ता है वहीं युग और काल का आशय भी है ।
रबी के  तामीर और इमारत शब्दों का हिन्दी में खूब इस्तेमाल होता है । तामीर यानी निर्माण, पुनर्निर्माण, रचना, सृजन आदि । यह तामीर भी इसी मूल से उपजा शब्द है । अपना जीवन अपने काम आने के साथ साथ औरों के काम आए, उसे ऐसा गढ़ना पड़ता है । जीवन को जीने लायक बनाने का भाव ही उम्र में है । तामीर अच्छी होगी तो इमारत भी बुलंद होगी । इल्म, हुनर, लियाक़त और क़ाबिलियत से ज़िंदगी को बेहतरीन बनाना ही असल बात है । यूँ अमारा में आवास और जीवन दोनो है । मूलतः आवास पहले, जीवन बाद में । मकान, भवन के अर्थ वाला इमारत शब्द इसी मूल से निकला है । ज़िंदगी की इमारत सिर्फ़ दीर्घायु (उम्रे-दराज़ ) से बुलंद नहीं होती क्योंकि उम्रे-दराज़ का जीवन की कठिनाइयों ( उम्रे-परीशाँ ) से गहरा रिश्ता है । जीवन के हर कालखण्ड का निर्माण करना पड़ता है । इसे ही ज़िंदगी बनाना कहते हैं । आजकल लोग इसमें “लाइफ़ बनना” देखते हैं ।
ब आते हैं आयु पर । उम्र के अर्थ में आयु शब्द का प्रयोग भी खूब होता है । मराठी में उम्र के लिए वय शब्द का प्रयोग अधिक होता है ठीक उसी तरह हिन्दी में आयु का । हिन्दी में उम्र के अर्थ में अकेले वय का प्रयोग दुर्लभ है अलबत्ता वयःसंधि, अल्पवय, मध्यवय, किशोरवय जैसे युग्मपदों का प्रयोग ज्यादा होता है । कृ.पा. कुलकर्णी के मराठी कोश के मुताबिक आयु की व्युत्पत्ति आयुस् से है जिसका अर्थ है जीवनीशक्ति, जीवनकाल । वाशि आप्टे आयुस की व्युत्पत्ति आ + इ + उस से बताते हैं जिसमें जीवनावधि, जीवनदायक शक्ति जैसे भाव हैं । गौरतलब है कि संस्कृत की ‘इ’ धातु में मूलतः गति का भाव है, जाना, बिखरना, फैलना, समा जाना, प्रविष्ट होना आदि । मोनियर विलियम्स के मुताबिक ‘इ’ का विशिष्ट रूप अय् से भी व्यक्त होता है जिसमें भी गति का भाव है । ध्यान रहे, जीवन का मूल लक्षण गति ही है । अय का रिश्ता ‘या’ धातु से भी है जिसमें भी जाने, गति करने का भाव है । यान, यात्री जैसे शब्द इसी कड़ी से निकले हैं । 
स ‘अय’ की व्याप्ति हिन्दी के कई शब्दों में है जैसे अयन् जिसका संस्कृत रूप है अयनम् या अयणम् जिसमें जाने, हिलने, गति करने का भाव है । अयनम् का अर्थ रास्ता, मार्ग, पगडण्डी, पथ आदि भी होता है । अवधि या संधिकाल जैसे भाव भी इसमें निहित हैं । अयनम् बना है अय् धातु से । इसमें फलने-फूलने, निकलने का भाव है जो गतिवाचक हैं । जाहिर है अयनम् में निहित गति, राह, बाट का आशय तार्किक है । रामायण या कृष्णायन पर गौर करें जिसमें राम की राह पर चलने या कृष्ण की बाट जाने का भाव है । कुल मिला कर आयु का अर्थ जीवन के फलने-फूलने, उसे सभ्य-संस्कारी बनाने से है । वही भाव, जो उम्र में व्यक्त हो रहा है । चिरायु, शतायु, दीर्घायु जैसे अन्य कई शब्दों से यह ज़ाहिर है । भारोपीय भाषाओं में और आपस में रूपान्तरित होते हैं । भाषाविदों ने भारोपीय भाषा परिवार में एक धातु अयु aiw की कल्पना की है जो संस्कृत आयु की समरूप है । का रूपान्तर में होने से अंग्रेजी का एज age इसी से बनता है जिसमें परिपक्वता, प्रौढ़ता, जीवनकाल जैसे भाव हैं । एज में काल और युग जैसी अर्थवत्ता भी है ।

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2 कमेंट्स:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सुंदर कड़ी। पर पढ़ने में जोर आया। कल सुबह दुबारा पढ़ता हूँ।

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत ही ज्ञानरंजन, शब्दों की न जाने कितनी परतें खुल गयीं ।

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